सर ने मुझे क्लास में ही चोदा


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Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by 007, Apr 23, 2016.

  1. 007

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    //brand-krujki.ru हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शिल्पा यादव हैं. सब से पहले मैं अपने बारें में आप लोगों को बता दूँ. मैं हरियाणा के यमुनानगर की रहनेवाली हूँ. मैं एक मिडल क्लास फेमली से बिलोंग करती हूँ और मेरे फाधर जॉब करते हैं. मेरी माँ एक हाउसवाइफ हैं. मेरी बड़ी सिस्टर की मेरेज को 4 साल हो गए हैं और मेरे से छोटा एक भाई हैं जो अभी कोलेज में हैं. मेरी हाईट 5 फिट 6 इंच हैं और मेरा रंग साफ़ गोरा हैं. अब स्टोरी स्टार्ट करते हैं.

    बात कुछ 5 साल पहले की हैं यानी की 2009 की. मैं कंप्यूटर सिखने के लिए सेंटर जाती थी. सेंटर पर कई सर और मेडम थे. उनमे से कुछ कुछ एक दुसरे से गंदे इशारे और बातें करते थे. लेकिन जिस सर की मैं बात कर रही हूँ उनकी उम्र कुछ 22-23 की थी. उनका नाम अनिरुद्ध हैं. उन्हें कंप्यूटर की बड़ी नोलेज थी. कुछ भी इश्यु हो फोरन गलती बता देते थे. उनका रंग सांवला था और उनका पेट थोडा बहार आया हुआ था. सर का फेमली बेकग्राउंड बहुत सॉलिड था और वो सिर्फ टाइम पास के लिए ही जॉब करते थे. उनसे बाकी के सर और मेडम बहुत डरते थे क्यूंकि वो थोड़े गुस्सेवाले थे. वो जॉब के साथ साथ आगे स्टडी भी करते थे.

    जब वो क्लास लेते तो कोई शोर नहीं करता और चुपचाप जो बताया जाएँ वो कर लेते थे. मुझे अभी यहाँ 8 महीने हो गए थे. एक दिन सर का फोन आया की वो आधा घंटा लेट आयेंगे. मैंने सर को चिढाने के लिए जानबूझ के एक हार्ड मिस्टेक निकाल के रखी थी. मैं अक्सर उन्हें ऐसे हैरान करती लेकिन वो फट से जवाब दे देते थे. जब सर आये तो मैंने उन्हें मिस्टेक दिखाई, उन्होंने दूसरी ही मिनिट उसे पकड ली. मैं हंस पड़ी और उन्होंने मेरी और देका. मुझे लगा की वो मेरी टी-शर्ट के उभार को देख रहे थे. मेरे बदन में एक ठंडी सी लहर दौड़ उठी ऊपर से निचे तक. सर भी हंस पड़े. मैं थोड़ी सी डर गई थी. और इसी वजह से मैं अगले दो दिन क्लास नहीं गई.

    तीसरे दिन सुबह 9 बजे मेरे फोन पर रिंग आई. मैं फोन उठाया.

    हेल्लो.

    किस से डर गई हो, मेरे से या अपनी गलती पकडे जाने से..!

    सामने अनिरुद्ध सर ही थे.

    मैंने कहा, नहीं सर ऐसी बात नहीं हैं, मैं बहार गई थी. कल से जरुर आउंगी सेंटर पर.

    ठीक हैं, यह मेरा नम्बर हैं कुछ काम हो तो.

    सर ने लास्ट वाला सेंटेस ऐसे बोला जैसे उसमे ढेर सारी वासना भरी हुई हो. मुझे लगा की शायद यह मेरा भ्रम ही हैं. क्यूंकि आजतक कभी भी सर ने कभी कोई गंदी बात नहीं की थी. दुसरे दिन मैं सेंटर पर गई. अनिरुद्ध सर आये तो मुझे देख के बड़े ही खुश हुए. उन्होंने स्टाफ वाले केबिन से ही मुझे मेसेज किया और अपनी ख़ुशी जताई. मैंने देखा की अब सर मुझे नियमित एसएम्एस करने लगे थे. कभी जोक्स तो कभी शायरी. कभी कभी माइल्ड डबल मीनिंग भी भेज देते थे. उनकी शायरी दिल वाली होती थी और मैं भी कभी कभी उन्हें शायरी रिप्लाय कर देती थी. अब सर के मेसेज डेली 50 से ऊपर होने लगे थे. मैंने उनका नाम बदल के लड़की का कर दिया था मोबाईल में ताकि कोई शक ना करें.

    और एक दिन तो सर ने हद ही कर दी. उन्होंने एक गंदी शायरी भेजी, मैंने कोई रिप्लाय नहीं किया उस पुरे दिन में. शाम को 8:30 बजे उनकी कॉल आई. मैंने ऊपर के कमरे में छिप के कॉल उठाई.

    क्या बात हैं शिल्पा, तुम रूठ गई क्या?

    नहीं सर, लेकिन ऐसे मेसेज से मुझे प्रॉब्लम हो सकती हैं.

    ठीक हैं मैं नहीं भेजूंगा. लेकिन प्लीज़ कोंटेक मत छोडो, मुझे चेन नहीं आता.

    सर अब खुला फ्लर्ट करने लगे थे. मैं भी उन्हें धीरे धीरे पसंद करने लगी थी. वो अब मुझे अपनी लाइफ की बहुत सी चीजें शेर करने लगे थे. उन्होंने मुझे यह भी बताया की उनका पहला अफेर उनकी मामा की बेटी के साथ ही था. वो मुझे भी मेरे बॉयफ्रेंड वगेरह के बारे में पूछते थे. मैंने उन्हें कहा की मेरा कोई बोयफ्रेंड नहीं हैं. अक्सर वो मस्ती में मुझे कहते की मुझे बना लो ना फिर.

    मैं हंस के उनकी बात को टाल देती थी. लेकिन होनी तो होनी होती हैं और हो के रहती हैं. ऐसा ही कुछ उस दिन हुआ. मैं घर से निकल चुकी थी और रास्ते में ही बिन मौसम के बरसात हो गई. उपर से मैं हलके रंग की टी-शर्ट और अंदर काली ब्रा पहनी थी. मैं आधे से ज्यादा भीग गई थी. कैसे कर के मैं सेंटर पहुंची. वहां देखा तो लाईट नहीं थी और एक दो सर बहार घूम रहे थे. वो लोग मेरी और बड़े ही अलग भाव से देख रहे थे. मेरे बूब्स जो बहार छलक रहे थे उनके यह भाव आने ही थे. तभी अनिरुद्ध सर दौड़ते हुए आये और उन्होंने वो दोनों सर के सामने देखा. वो दोनों वहां से खिसक लिए. सर ने मुझे देखा और हंस पड़े.

    आज छुट्टी कर लेती, वैसे भी तुम्हारी बेच का कोई नहीं आया हैं अभी तक. मैं क्लास में मख्खियाँ ही मार रहा था. और अगर कोई आया भी तो लाईट नहीं हैं.

    मैंने कहा, फिर मैं जाती हूँ घर वापस.

    सर ने कहा, बारिस में और भीगने का इरादा हैं क्या. बारिस कम हो लेने दो मैं तुम्हे अपनी बाइक से लिफ्ट दे दूंगा.

    इतनी बात कर के हम लोग क्लास में जा बैठे. सर ने सही कहा था वहाँ कोई भी नहीं था. ऊपर से क्लास का एक कौन अँधेरे की वजह से पूरा डार्क था. सर मेरे साथ ही बेंच पर बैठे और मुझे देखने लगे.

    शिल्पा तुम सच में मस्त दिखती हो.

    मैंने शर्म से अपना मुहं निचे किया.

    और आज तो तुम्हारा बदन भीगने के बाद कयामत बना हुआ हैं.! सच में किसी की भी गलती नहीं हैं अगर वो तुम्हें देखता रहे.

    सर की तारीफ़ से मेरी चूत गीली होने लगी थी अब. सर बिना रुके बोलते रहे.

    काश मेरी एक गर्लफ्रेंड होती तुम्हारे जैसी!

    अब मैंने उनकी और देखा और हंस पड़ी.

    और मेरे हंसने से जैसे सर के अंदर हिम्मत का दरिया फुट निकला. उन्होंने मुझे अपनी और खिंच के अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए. एक पल के लिए तो मुझे जैसे कुछ पता ही नहीं चला. मेरे होंठो को जैसे सर ने जादू किया था, वो उनके साथ हो गए थे. मैंने मुश्किल से सर का माथा अपने से दूर किया.

    सर कोई देख लेंगा, प्लीज़.

    शिल्पा, आई लव यू यार, मैं सच्चे दील से तुम्हे चाहता हूँ..!

    मेरे पास सर की बात का कोई जवाब नहीं था. मैंने मुड़ के दरवाजे की और देखा और फिर सर की और देखा.

    कोई नहीं आयेंगा इधर, और आया तो हमें कदमों की आहट से खबर हो जाएंगी. इतना कहते ही उनके होंठ वापस मेरे होंठो पर आ गए. वो मेरे होंठ चूस रहे थे खिंच खिंच के. मैं पहले तो कुछ नहीं कर रही थी लेकिन फिर मेरा बदन भी सर के साथ हो लिया. मैंने भी उनके बाल अपने हाथ में पकडे और उन्हें खिंच के मैं उनके किस को साथ देने लगी. सर का हाथ मेरे बूब्स पे आ गया और वो उसे जोर से दबाने लगे. यह मेरा पहला स्पर्श था मर्द का अपने बूब्स के ऊपर. मुझे बहुत ही हॉट फिल हो रहा था पुरे बदन के अंदर. सर ने मेरे दोनों चुंचे मस्त मसले और फिर उनका हाथ मेरी जांघो को सहलाने लगा. तभी किसी के कदमों किआ आहट हुई. सर फट से उठ के बेंच के सामने खड़े हो गए.

    आनेवाला व्यक्ति प्यून था.

    सर, बड़े साहब ने कहा हैं की सेंटर पर आज छुट्टी रख देंगे.

    अनिरुद्ध सर बोले, ठीक हैं बाबू, सर को बोलो बारिस रुक लेने दो जरा फिर हम निकलेंगे.

    सर, बड़े साहब तो कह के निकल गए हैं. और साथ में दुसरे टीचर लोग भी निकल गए हैं. मुझे ही सेंटर को लोक करना हैं.

    यह सुनते ही सर की आँखे चमक उठी. वो बोले, एक काम करो बाबू, चाबी मुझे दे दो. मैं लोक कर दूंगा. वैसे भी मैं सुबह में सब से पहले आता हूँ.

    बाबू हमारी और देखने लगा. सर उसके कंधे पर हाथ रख के उसे बहार ले गए. शायद उसे खर्चा पानी दे के सर ने भगा दिया वहां से.

    1 मिनिट में सर अंदर आये और बोले, अब किसी के आने का कोई डर नहीं हैं. अब सेंटर में हम दोनों ही हैं.

    मेरा दील अपनी एक धडकन भूल गया. मैं समझ नहीं पा रही थी की यह मेरे लिए सही था या गलत. सर वापस मेरी और आयें और उन्होंने फिर से मेरे होंठो को अपने कब्जे में ले लिया. मेरी निपल्स अकड़ने लगी थी अब तो. सर का हाथ वापस मेरी जांघ पर आया, मुझे पुरे बदन में गर्मी चढने लगी थी. सर ने जैसे ही जांघ के बिच में हाथ डाला मैं तो जैसे उछल ही पड़ी. सर मेरी योनी यानी की चूत को सहला रहे थे मेरी जींस के ऊपर से ही. मैं उत्तेजित हो गई थी और मेरे होंठ पर भी गर्मी होने लगी थी. मेरे होंठ कांपने लगे थे अब. सर ने मेरी और देखा और बोले, शिल्पा, क्या तुम अभी तक वर्जिन हों?

    मैंने हाँ में सर हलाया. सर को तो जैसे बड़ी लोटरी लगी हो. वो मुझे गले से लगा के मेरे गाल और होंठो को जोर जोर से चूमने लगे.

    शिल्पा आज का दिन तुम अपनी जिन्दगी में हमेंशा याद रखोगी.

    सर के स्पर्श से अब मैं भी हॉट हो चुकी थी. सर ने अब धीरे से मेरी टी-शर्ट को ऊपर किया और मेरी मदद से उसे उतार फेंकी. उन्होंने मुझे बेंच पर खड़ा किया और मेरी जींस की बटन भी खोल दी. मेरी जींस उतारते ही मुझे बहुत शर्म महसूस होने लगी. मैंने अपने दोनों हाथों से अपने मुहं को ढंक दिया. सर ने हंस के कहा, शिल्पा शरमाओ मत कभी ना कभी तो इसे उतरना ही था.!

    और फिर उनके हाथ पेंटी के ऊपर घुमने लगे. जहाँ पर योनी का छेद होता हैं वहां पर वो सहलाने लगे. पता नहीं कैसे लेकिन मेरी चूत से पेशाब आने लगा था, मैं वो 8-10 बूंदों को अपनी पेंटी के ऊपर देख रही थी. सर ने अब धीरे से पेंटी की पट्टी को पकड़ा और उसे निचे खिंचा. मेरी चूत के बालों के बिच में मेरी चूत को देख के वो हंस पड़े.

    Code:
    
    
    शिल्पा तुम बहोत हॉट और सेक्सी हो. आई लव यू...इतना कह के उनके होंठ मेरी चूत पर आ गए. वो मेरी चूत को कुत्ते की तरह जीभ निकाल के चाटने लगे. मुझे तो जैसे हाई फीवर हो गया था. मेरे बदन के एक एक भाग में जैसे आग लगा दी गई थी. सर ने अपनी जीभ जब चूत के छेद में डाली तब तो मैं उड़ने लगी थी जैसे. सर के हाथ मेरी गांड को सहला रहे थे और वो जबान से मेरी चूत के एक एक हिस्से को चाट रहे थे. वो चूत के छेद में कभी अपनी जबान डालते थे और कभी उपर के बालों को अपने मुहं में ले के उन्हें खींचते थे. मुझे यह सब क्रियाओं से इतना मजा आ रहा था की जिसकी कोई हद ही नहीं हैं. मैं उड़ने लगी थी बिना पंखो के ही. सर मेरी चूत को 2-3 मिनिट और ऐसे ही चूसते रहे और फिर उन्होंने खड़े होक मुझे निचे बेंच पर बिठा दिया.

    सर ने अब अपनी पेंट को खोला और शर्ट भी निकाल दिया. वो मेरे सामने बनियान और चड्डी में थे. फिर उन्होंने धीरे से अपनी चड्डी निकाली. बाप रे सर का लंड कितना काला था! क्यूंकि वो सांवले थे इसलिए उनका लंड कोयले की माफिक काला था. वो खड़ा था और उसका सुपाडा खुल चूका था. मैंने देखा की लंड के ऊपर की चमड़ी निचे आ चुकी थी. सर ने मुझे बेंच पर ही टाँगे खोलने के लिए कहा.

    शिल्पा अपनी एक टांग को इधर की बेंच पर दूसरी को उधर की बेंच पर रख दो.

    मेरे ऐसा करने की वेट किये बिना ही वो खुद मेरी टांगो को सेट करने लगे. अब मेरी चूत खुली थी उनके सामने. सर ने अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ा और उसे मेरी चूत के ऊपर घिसने लगे. उनका लंड बहुत ही गर्म था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उनके लंड को घिसने से. सर ने फिर मेरे होंठो को अपने होंठो से लगाया और निचे एक हल्का झटका दिया..!

    उईईइ माँ मर गई रेईईईईईईस्सस्सस..सररररररर..बहुत दर्द हो रह्हाआआआअ हैं.मेरी चीख निकल पड़ी, होंठो को होंठो से हटाने के चक्कर में मुझे हलकी खरोंच भी आ गई.

    सर ने मुझे कंधे से पकड़ा और बोले, शिल्पा एक मिनिट में ही दर्द मजे में बदल जायेंगा, आराम से करूँगा कोई दर्द नहीं होंगा डार्लिंग.

    सर अब धीरे धीरे अपने लंड को चूत में आगे पीछे करने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की चूत में लोहें की जलती सलाख को पेल दिया गया था. सर अभी भी धीरे धीरे लंड को अंदर से बहार और फिर बहार से धीरे से अंदर कर रहे थे. और जैसा उन्होंने कहा था मुझे कुछ देर में मजा भी आने लगा. सर ने मेरी और देखा, मैंने अपनेदांतों के तले होंठो को दबाया हुआ था.

    शिल्पा, अब कैसा हैं दर्द.

    मैंने सर को थोडा हलाया और दर्द कम होने का जवाब दिया.

    और दुसरे ही पल सर लंड को अब पूरा चूत में डाल के निकालने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे लंड को मेरे पेट के साथ टकराया जा रहा हों. सर अपने पेट को आगे पीछे कर रहे थे और मेरी चूत के अंदर लंड को धकेल रहे थे. मुझे अब मजा आने लगा था. मैं अपने हाथ को पीछे कर के बेंच पर रख दिया. सर अब मेरी चूत को ठोक रहे थे जोर जोर से और मुझे बड़ा मजा आने लगा था. मैं आह आह करते हुए अपनी चूत की चुदाई कर रहे मेरे सांवले सर को देख रही थी. अनिरुद्ध सर के मुहं से भी आह आह निकल रही थी क्यूंकि शायद मेरी चूत बड़ी टाईट थी.

    सर पांच मिनिट तक मुझे चोदते रहे और फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और बोले, शिल्पा बेंच के ऊपर उलटी बैठ जाओ ना. मैं डर गई की सर कही गांड ना मारे मेरी.

    लेकिन मैं उलटी हुई और अपनी गांड को ऊपर उठाया. सर ने अपने हाथ में थोडा थूंक ले के मेरी चूत पर मला और फिर अपने लंड को सेट करने लगे. लंड सेट होते ही मैंने मुंडी हिलाई. और सर ने एक करारे प्रहार से चूत को भर दिया. उस वक्त मुझे जो संतोष मिला वो दुनिया में किसी और चीज से नहीं मिल सकता था. सर की गति फिर से बढ़ी और वो मुझे जोर जोर से चोदते रहे. उनके हाथ मेरी कोमल गांड को सहला रहे थे और उनका लंड मेरी चूत खरोद रहा था. इस अवस्था में तो उनका लंड चूत की गहराई तक घुस रहा था और मेरा मजा जैसे दुगुना हो गया था. सर मेरी चूत को ऐसे ही रगड़ते रहे और फिर उनके मुहं से एक जोर की आह निकली.

    उनके लंड की नाली से ढेर सारा पानी निकला और मेरी चूत में भर गया. सर ने आखरी दो झटके लगाए और पानी पूरा अंदर निकाल दिया. मुझे उस चरमसीमा का मजा अभी तक याद हैं. सर ने जब लंड चूत से निकाला तो वो बहुत खुश थे, जैसे उन्होंने वर्जिन चूत नहीं चोदी हो लेकिन हिमालय को लंड से उठा लिया हो..!
  2. 007

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    हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शिल्पा यादव हैं. सब से पहले मैं अपने बारें में आप लोगों को बता दूँ. मैं हरियाणा के यमुनानगर की रहनेवाली हूँ. मैं एक मिडल क्लास फेमली से बिलोंग करती हूँ और मेरे फाधर जॉब करते हैं. मेरी माँ एक हाउसवाइफ हैं. मेरी बड़ी सिस्टर की मेरेज को 4 साल हो गए हैं और मेरे से छोटा एक भाई हैं जो अभी कोलेज में हैं. मेरी हाईट 5 फिट 6 इंच हैं और मेरा रंग साफ़ गोरा हैं. अब स्टोरी स्टार्ट करते हैं.

    बात कुछ 5 साल पहले की हैं यानी की 2009 की. मैं कंप्यूटर सिखने के लिए सेंटर जाती थी. सेंटर पर कई सर और मेडम थे. उनमे से कुछ कुछ एक दुसरे से गंदे इशारे और बातें करते थे. लेकिन जिस सर की मैं बात कर रही हूँ उनकी उम्र कुछ 22-23 की थी. उनका नाम अनिरुद्ध हैं. उन्हें कंप्यूटर की बड़ी नोलेज थी. कुछ भी इश्यु हो फोरन गलती बता देते थे. उनका रंग सांवला था और उनका पेट थोडा बहार आया हुआ था. सर का फेमली बेकग्राउंड बहुत सॉलिड था और वो सिर्फ टाइम पास के लिए ही जॉब करते थे. उनसे बाकी के सर और मेडम बहुत डरते थे क्यूंकि वो थोड़े गुस्सेवाले थे. वो जॉब के साथ साथ आगे स्टडी भी करते थे.

    जब वो क्लास लेते तो कोई शोर नहीं करता और चुपचाप जो बताया जाएँ वो कर लेते थे. मुझे अभी यहाँ 8 महीने हो गए थे. एक दिन सर का फोन आया की वो आधा घंटा लेट आयेंगे. मैंने सर को चिढाने के लिए जानबूझ के एक हार्ड मिस्टेक निकाल के रखी थी. मैं अक्सर उन्हें ऐसे हैरान करती लेकिन वो फट से जवाब दे देते थे. जब सर आये तो मैंने उन्हें मिस्टेक दिखाई, उन्होंने दूसरी ही मिनिट उसे पकड ली. मैं हंस पड़ी और उन्होंने मेरी और देका. मुझे लगा की वो मेरी टी-शर्ट के उभार को देख रहे थे. मेरे बदन में एक ठंडी सी लहर दौड़ उठी ऊपर से निचे तक. सर भी हंस पड़े. मैं थोड़ी सी डर गई थी. और इसी वजह से मैं अगले दो दिन क्लास नहीं गई.

    तीसरे दिन सुबह 9 बजे मेरे फोन पर रिंग आई. मैं फोन उठाया.

    हेल्लो.

    किस से डर गई हो, मेरे से या अपनी गलती पकडे जाने से..!

    सामने अनिरुद्ध सर ही थे.

    मैंने कहा, नहीं सर ऐसी बात नहीं हैं, मैं बहार गई थी. कल से जरुर आउंगी सेंटर पर.

    ठीक हैं, यह मेरा नम्बर हैं कुछ काम हो तो.

    सर ने लास्ट वाला सेंटेस ऐसे बोला जैसे उसमे ढेर सारी वासना भरी हुई हो. मुझे लगा की शायद यह मेरा भ्रम ही हैं. क्यूंकि आजतक कभी भी सर ने कभी कोई गंदी बात नहीं की थी. दुसरे दिन मैं सेंटर पर गई. अनिरुद्ध सर आये तो मुझे देख के बड़े ही खुश हुए. उन्होंने स्टाफ वाले केबिन से ही मुझे मेसेज किया और अपनी ख़ुशी जताई. मैंने देखा की अब सर मुझे नियमित एसएम्एस करने लगे थे. कभी जोक्स तो कभी शायरी. कभी कभी माइल्ड डबल मीनिंग भी भेज देते थे. उनकी शायरी दिल वाली होती थी और मैं भी कभी कभी उन्हें शायरी रिप्लाय कर देती थी. अब सर के मेसेज डेली 50 से ऊपर होने लगे थे. मैंने उनका नाम बदल के लड़की का कर दिया था मोबाईल में ताकि कोई शक ना करें.

    और एक दिन तो सर ने हद ही कर दी. उन्होंने एक गंदी शायरी भेजी, मैंने कोई रिप्लाय नहीं किया उस पुरे दिन में. शाम को 8:30 बजे उनकी कॉल आई. मैंने ऊपर के कमरे में छिप के कॉल उठाई.

    क्या बात हैं शिल्पा, तुम रूठ गई क्या?

    नहीं सर, लेकिन ऐसे मेसेज से मुझे प्रॉब्लम हो सकती हैं.

    ठीक हैं मैं नहीं भेजूंगा. लेकिन प्लीज़ कोंटेक मत छोडो, मुझे चेन नहीं आता.

    सर अब खुला फ्लर्ट करने लगे थे. मैं भी उन्हें धीरे धीरे पसंद करने लगी थी. वो अब मुझे अपनी लाइफ की बहुत सी चीजें शेर करने लगे थे. उन्होंने मुझे यह भी बताया की उनका पहला अफेर उनकी मामा की बेटी के साथ ही था. वो मुझे भी मेरे बॉयफ्रेंड वगेरह के बारे में पूछते थे. मैंने उन्हें कहा की मेरा कोई बोयफ्रेंड नहीं हैं. अक्सर वो मस्ती में मुझे कहते की मुझे बना लो ना फिर.

    मैं हंस के उनकी बात को टाल देती थी. लेकिन होनी तो होनी होती हैं और हो के रहती हैं. ऐसा ही कुछ उस दिन हुआ. मैं घर से निकल चुकी थी और रास्ते में ही बिन मौसम के बरसात हो गई. उपर से मैं हलके रंग की टी-शर्ट और अंदर काली ब्रा पहनी थी. मैं आधे से ज्यादा भीग गई थी. कैसे कर के मैं सेंटर पहुंची. वहां देखा तो लाईट नहीं थी और एक दो सर बहार घूम रहे थे. वो लोग मेरी और बड़े ही अलग भाव से देख रहे थे. मेरे बूब्स जो बहार छलक रहे थे उनके यह भाव आने ही थे. तभी अनिरुद्ध सर दौड़ते हुए आये और उन्होंने वो दोनों सर के सामने देखा. वो दोनों वहां से खिसक लिए. सर ने मुझे देखा और हंस पड़े.

    आज छुट्टी कर लेती, वैसे भी तुम्हारी बेच का कोई नहीं आया हैं अभी तक. मैं क्लास में मख्खियाँ ही मार रहा था. और अगर कोई आया भी तो लाईट नहीं हैं.

    मैंने कहा, फिर मैं जाती हूँ घर वापस.

    सर ने कहा, बारिस में और भीगने का इरादा हैं क्या. बारिस कम हो लेने दो मैं तुम्हे अपनी बाइक से लिफ्ट दे दूंगा.

    इतनी बात कर के हम लोग क्लास में जा बैठे. सर ने सही कहा था वहाँ कोई भी नहीं था. ऊपर से क्लास का एक कौन अँधेरे की वजह से पूरा डार्क था. सर मेरे साथ ही बेंच पर बैठे और मुझे देखने लगे.

    शिल्पा तुम सच में मस्त दिखती हो.

    मैंने शर्म से अपना मुहं निचे किया.

    और आज तो तुम्हारा बदन भीगने के बाद कयामत बना हुआ हैं.! सच में किसी की भी गलती नहीं हैं अगर वो तुम्हें देखता रहे.

    सर की तारीफ़ से मेरी चूत गीली होने लगी थी अब. सर बिना रुके बोलते रहे.

    काश मेरी एक गर्लफ्रेंड होती तुम्हारे जैसी!

    अब मैंने उनकी और देखा और हंस पड़ी.

    और मेरे हंसने से जैसे सर के अंदर हिम्मत का दरिया फुट निकला. उन्होंने मुझे अपनी और खिंच के अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए. एक पल के लिए तो मुझे जैसे कुछ पता ही नहीं चला. मेरे होंठो को जैसे सर ने जादू किया था, वो उनके साथ हो गए थे. मैंने मुश्किल से सर का माथा अपने से दूर किया.

    सर कोई देख लेंगा, प्लीज़.

    शिल्पा, आई लव यू यार, मैं सच्चे दील से तुम्हे चाहता हूँ..!

    मेरे पास सर की बात का कोई जवाब नहीं था. मैंने मुड़ के दरवाजे की और देखा और फिर सर की और देखा.

    कोई नहीं आयेंगा इधर, और आया तो हमें कदमों की आहट से खबर हो जाएंगी. इतना कहते ही उनके होंठ वापस मेरे होंठो पर आ गए. वो मेरे होंठ चूस रहे थे खिंच खिंच के. मैं पहले तो कुछ नहीं कर रही थी लेकिन फिर मेरा बदन भी सर के साथ हो लिया. मैंने भी उनके बाल अपने हाथ में पकडे और उन्हें खिंच के मैं उनके किस को साथ देने लगी. सर का हाथ मेरे बूब्स पे आ गया और वो उसे जोर से दबाने लगे. यह मेरा पहला स्पर्श था मर्द का अपने बूब्स के ऊपर. मुझे बहुत ही हॉट फिल हो रहा था पुरे बदन के अंदर. सर ने मेरे दोनों चुंचे मस्त मसले और फिर उनका हाथ मेरी जांघो को सहलाने लगा. तभी किसी के कदमों किआ आहट हुई. सर फट से उठ के बेंच के सामने खड़े हो गए.

    आनेवाला व्यक्ति प्यून था.

    सर, बड़े साहब ने कहा हैं की सेंटर पर आज छुट्टी रख देंगे.

    अनिरुद्ध सर बोले, ठीक हैं बाबू, सर को बोलो बारिस रुक लेने दो जरा फिर हम निकलेंगे.

    सर, बड़े साहब तो कह के निकल गए हैं. और साथ में दुसरे टीचर लोग भी निकल गए हैं. मुझे ही सेंटर को लोक करना हैं.

    यह सुनते ही सर की आँखे चमक उठी. वो बोले, एक काम करो बाबू, चाबी मुझे दे दो. मैं लोक कर दूंगा. वैसे भी मैं सुबह में सब से पहले आता हूँ.

    बाबू हमारी और देखने लगा. सर उसके कंधे पर हाथ रख के उसे बहार ले गए. शायद उसे खर्चा पानी दे के सर ने भगा दिया वहां से.

    1 मिनिट में सर अंदर आये और बोले, अब किसी के आने का कोई डर नहीं हैं. अब सेंटर में हम दोनों ही हैं.

    मेरा दील अपनी एक धडकन भूल गया. मैं समझ नहीं पा रही थी की यह मेरे लिए सही था या गलत. सर वापस मेरी और आयें और उन्होंने फिर से मेरे होंठो को अपने कब्जे में ले लिया. मेरी निपल्स अकड़ने लगी थी अब तो. सर का हाथ वापस मेरी जांघ पर आया, मुझे पुरे बदन में गर्मी चढने लगी थी. सर ने जैसे ही जांघ के बिच में हाथ डाला मैं तो जैसे उछल ही पड़ी. सर मेरी योनी यानी की चूत को सहला रहे थे मेरी जींस के ऊपर से ही. मैं उत्तेजित हो गई थी और मेरे होंठ पर भी गर्मी होने लगी थी. मेरे होंठ कांपने लगे थे अब. सर ने मेरी और देखा और बोले, शिल्पा, क्या तुम अभी तक वर्जिन हों?

    मैंने हाँ में सर हलाया. सर को तो जैसे बड़ी लोटरी लगी हो. वो मुझे गले से लगा के मेरे गाल और होंठो को जोर जोर से चूमने लगे.

    शिल्पा आज का दिन तुम अपनी जिन्दगी में हमेंशा याद रखोगी.

    सर के स्पर्श से अब मैं भी हॉट हो चुकी थी. सर ने अब धीरे से मेरी टी-शर्ट को ऊपर किया और मेरी मदद से उसे उतार फेंकी. उन्होंने मुझे बेंच पर खड़ा किया और मेरी जींस की बटन भी खोल दी. मेरी जींस उतारते ही मुझे बहुत शर्म महसूस होने लगी. मैंने अपने दोनों हाथों से अपने मुहं को ढंक दिया. सर ने हंस के कहा, शिल्पा शरमाओ मत कभी ना कभी तो इसे उतरना ही था.!

    और फिर उनके हाथ पेंटी के ऊपर घुमने लगे. जहाँ पर योनी का छेद होता हैं वहां पर वो सहलाने लगे. पता नहीं कैसे लेकिन मेरी चूत से पेशाब आने लगा था, मैं वो 8-10 बूंदों को अपनी पेंटी के ऊपर देख रही थी. सर ने अब धीरे से पेंटी की पट्टी को पकड़ा और उसे निचे खिंचा. मेरी चूत के बालों के बिच में मेरी चूत को देख के वो हंस पड़े.

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    शिल्पा तुम बहोत हॉट और सेक्सी हो. आई लव यू...इतना कह के उनके होंठ मेरी चूत पर आ गए. वो मेरी चूत को कुत्ते की तरह जीभ निकाल के चाटने लगे. मुझे तो जैसे हाई फीवर हो गया था. मेरे बदन के एक एक भाग में जैसे आग लगा दी गई थी. सर ने अपनी जीभ जब चूत के छेद में डाली तब तो मैं उड़ने लगी थी जैसे. सर के हाथ मेरी गांड को सहला रहे थे और वो जबान से मेरी चूत के एक एक हिस्से को चाट रहे थे. वो चूत के छेद में कभी अपनी जबान डालते थे और कभी उपर के बालों को अपने मुहं में ले के उन्हें खींचते थे. मुझे यह सब क्रियाओं से इतना मजा आ रहा था की जिसकी कोई हद ही नहीं हैं. मैं उड़ने लगी थी बिना पंखो के ही. सर मेरी चूत को 2-3 मिनिट और ऐसे ही चूसते रहे और फिर उन्होंने खड़े होक मुझे निचे बेंच पर बिठा दिया.

    सर ने अब अपनी पेंट को खोला और शर्ट भी निकाल दिया. वो मेरे सामने बनियान और चड्डी में थे. फिर उन्होंने धीरे से अपनी चड्डी निकाली. बाप रे सर का लंड कितना काला था! क्यूंकि वो सांवले थे इसलिए उनका लंड कोयले की माफिक काला था. वो खड़ा था और उसका सुपाडा खुल चूका था. मैंने देखा की लंड के ऊपर की चमड़ी निचे आ चुकी थी. सर ने मुझे बेंच पर ही टाँगे खोलने के लिए कहा.

    शिल्पा अपनी एक टांग को इधर की बेंच पर दूसरी को उधर की बेंच पर रख दो.

    मेरे ऐसा करने की वेट किये बिना ही वो खुद मेरी टांगो को सेट करने लगे. अब मेरी चूत खुली थी उनके सामने. सर ने अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ा और उसे मेरी चूत के ऊपर घिसने लगे. उनका लंड बहुत ही गर्म था. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उनके लंड को घिसने से. सर ने फिर मेरे होंठो को अपने होंठो से लगाया और निचे एक हल्का झटका दिया..!

    उईईइ माँ मर गई रेईईईईईईस्सस्सस..सररररररर..बहुत दर्द हो रह्हाआआआअ हैं.मेरी चीख निकल पड़ी, होंठो को होंठो से हटाने के चक्कर में मुझे हलकी खरोंच भी आ गई.

    सर ने मुझे कंधे से पकड़ा और बोले, शिल्पा एक मिनिट में ही दर्द मजे में बदल जायेंगा, आराम से करूँगा कोई दर्द नहीं होंगा डार्लिंग.

    सर अब धीरे धीरे अपने लंड को चूत में आगे पीछे करने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की चूत में लोहें की जलती सलाख को पेल दिया गया था. सर अभी भी धीरे धीरे लंड को अंदर से बहार और फिर बहार से धीरे से अंदर कर रहे थे. और जैसा उन्होंने कहा था मुझे कुछ देर में मजा भी आने लगा. सर ने मेरी और देखा, मैंने अपनेदांतों के तले होंठो को दबाया हुआ था.

    शिल्पा, अब कैसा हैं दर्द.

    मैंने सर को थोडा हलाया और दर्द कम होने का जवाब दिया.

    और दुसरे ही पल सर लंड को अब पूरा चूत में डाल के निकालने लगे. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे लंड को मेरे पेट के साथ टकराया जा रहा हों. सर अपने पेट को आगे पीछे कर रहे थे और मेरी चूत के अंदर लंड को धकेल रहे थे. मुझे अब मजा आने लगा था. मैं अपने हाथ को पीछे कर के बेंच पर रख दिया. सर अब मेरी चूत को ठोक रहे थे जोर जोर से और मुझे बड़ा मजा आने लगा था. मैं आह आह करते हुए अपनी चूत की चुदाई कर रहे मेरे सांवले सर को देख रही थी. अनिरुद्ध सर के मुहं से भी आह आह निकल रही थी क्यूंकि शायद मेरी चूत बड़ी टाईट थी.

    सर पांच मिनिट तक मुझे चोदते रहे और फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और बोले, शिल्पा बेंच के ऊपर उलटी बैठ जाओ ना. मैं डर गई की सर कही गांड ना मारे मेरी.

    लेकिन मैं उलटी हुई और अपनी गांड को ऊपर उठाया. सर ने अपने हाथ में थोडा थूंक ले के मेरी चूत पर मला और फिर अपने लंड को सेट करने लगे. लंड सेट होते ही मैंने मुंडी हिलाई. और सर ने एक करारे प्रहार से चूत को भर दिया. उस वक्त मुझे जो संतोष मिला वो दुनिया में किसी और चीज से नहीं मिल सकता था. सर की गति फिर से बढ़ी और वो मुझे जोर जोर से चोदते रहे. उनके हाथ मेरी कोमल गांड को सहला रहे थे और उनका लंड मेरी चूत खरोद रहा था. इस अवस्था में तो उनका लंड चूत की गहराई तक घुस रहा था और मेरा मजा जैसे दुगुना हो गया था. सर मेरी चूत को ऐसे ही रगड़ते रहे और फिर उनके मुहं से एक जोर की आह निकली.

    उनके लंड की नाली से ढेर सारा पानी निकला और मेरी चूत में भर गया. सर ने आखरी दो झटके लगाए और पानी पूरा अंदर निकाल दिया. मुझे उस चरमसीमा का मजा अभी तक याद हैं. सर ने जब लंड चूत से निकाला तो वो बहुत खुश थे, जैसे उन्होंने वर्जिन चूत नहीं चोदी हो लेकिन हिमालय को लंड से उठा लिया हो..!
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